राजस्थान में मरूस्थलीय मिट्टी कहाँ पाई जाती है ?
उत्तर – राजस्थान में मरूस्थलीय मिट्टी बीकानेर, जैसलमेर, नागौर, फलौदी, अनूपगढ़, बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर ग्रामीण, सीकर एवं चुरू जिलों में पाई जाती है।
मरूस्थलीय मिट्टी की विशेषताएँ
- मरूस्थलीय मिट्टी को बलुई मिट्टी व मरूस्थलीय रेतीली मिट्टी भी कहा जाता है।
- यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में पाई जाती है।
- यह राजस्थान में सबसे अधिक (दो-तिहाई) भू-भाग पर पायी जाने वााली मिट्टी है।
- थार मरूस्थल में ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर से बलुई मिट्टी का निर्माण हुआ है।
- इस मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है और यह अनुपजाऊ होती है।
- इस मिट्टी में कैल्सियम-फास्फेट की अधिकता होती है तथा नाइट्रोजन एवं कार्बनिक लवणों की कमी होती है।
- इसमें बाजरा, मूंग, मोठ जैसी फसलों का उत्पादन होता है।
- इस क्षेत्र में खड़ीन की खेती सर्वाधिक मात्रा में की जाती है।
- यह मोटे कण वाली मिट्टी है।
- इसमें नमी धारण करने की क्षमता होती है।
- इसे ’नमकीन व प्यासी मिट्टी’ भी कहते है।
- यह मिट्टी पहले नदियों द्वारा लाई गई थी, परन्तु अब यहाँ नदियाँ देखने को नहीं मिलती, इसलिए यह अनुपजाऊ हो गयी है।
मरूस्थलीय रेतीली मिट्टी के प्रकार
मरूस्थलीय रेतीली मिट्टी मुख्यतः तीन प्रकार की होती है।
(क) लाल रेतीली मिट्टी –
- लाल रेतीली मिट्टी राजस्थान के जोधपुर, पाली, जालौर, चुरू, झुंझुनूं आदि जिलों में पायी जाती है।
(ख) खारी मिट्टी –
- खारी मिट्टी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और नागौर आदि जिलों में पायी जाती है।
- इस मिट्टी में लवण होते है।
- इस मिट्टी में खेती नहीं की जा सकती।
(ग) पीली भूरी रेतीली मिट्टी –
- यह मिट्टी राजस्थान के नागौर और पाली जिले में पायी जाती है।
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